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dil hii dil me.n sulag ke bujhe ham

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दिल ही दिल में सुलगके बुझे हम और सहे ग़म दूर ही दूर
तुमसे कौन सी आस बँधी थी तुमसे रहे हम दूर ही दूर

तुमने हमको जब भी देखा, ???लब थे या ख़ामोश
यूँ तो अक्सर रोये लेकिन छुप छुप कम कम दूर ही दूर

एक वो आन कि उनकी ज़रा सी बात गवारा कर ना सके
एक ये हाल कि याद में उनकी रोए पैहम दूर ही दूर

तर्क-ए-तलब पर ख़ुश थे कि आखिर काम लिया दानाई से
किसको ख़बर है जलते रहे तुम जलते रहे हम दूर ही दूर

Comments/Credits:

			 % Contributor: Vinay P Jain
% Transliterator: Vinay P Jain
% Date: 27 Jul 2003
% Series: GEETanjali
% generated using giitaayan
		     
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