mere bas me.n yaa to yaarab wo sitam\-sha_aar hotaa
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मेरे बस में या तो यारब वो सितम-शआर होता
ये न था तो काश दिल पर मुझे अख़्तियार होता
जो निगाह की थी जानिब तो फिर आँख क्यूँ चुराई
वो ही तीर क्यूँ न मारा जो जिगर के पार होता
तेरा मयकदा सलामत तेरे ख़ूँ की ख़ैर तासीर
मेरा नशा क्यूँ उतरता मुझे क्यूँ खुमार होता
नहीं पूछता है मुझको कोई फूल इस चमन में
दिल-ए-दाग़दार होता तो गले का हार होता
मेरी ख़ाक भी चमन में न रही 'अमीर' बाकी
उन्हें मरने ही का अब तक नहीं ऐतबार होता