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dil apanaa mayakashii kaa talabagaar bhii nahii.n

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दिल अपना मयकशी का तलबगार भी नहीं
हाँ वो अगर पिलायें तो इन्कार भी नहीं

अहद-ए-वफ़ा की सुबहो का क्या ज़िक्र दोस्तो
अहद-ए-वफ़ा की सुबहो के आसार भी नहीं

सूना पड़ा है देर से मयख़ाना-ए-वफ़ा
साक़ी का ज़िक्र क्या कोई मयख़ार भी नहीं

गुलशन उजाड़ हो गया दुनिया बदल गई
क्या ढूँढते हो गुल के यहाँ ख़ार भी नहीं

'दर्शन' न पूछो ज़ुल्मत-ए-दुनिया-ए-आशीक़ी
कोई चराग़ अब तो सर-ए-दार भी नहीं

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